September 19, 2024
Himachal

मनरेगा के तहत कार्य दिवस 275 लाख से बढ़कर 300 लाख हुआ

धर्मशाला, 10 जून केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत लोगों को दिए जाने वाले कार्यदिवसों की संख्या 275 लाख से बढ़ाकर 300 लाख कर दी है। सूत्रों ने यहां बताया कि हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत काम की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि रोजगार के लिए मानव दिवसों की संख्या बढ़ाकर 350 लाख की जाए। हालांकि, केंद्र सरकार ने राज्य में मनरेगा के तहत दिए जाने वाले मानव दिवसों की संख्या 275 लाख से बढ़ाकर 300 लाख कर दी है।

इसे और भी बढ़ाया जा सकता है ग्रामीण विकास एवं पंचायत निदेशक ने बताया कि राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध करवाने का 20 प्रतिशत लक्ष्य पहले ही पूरा कर लिया है। यदि राज्य जनवरी 2025 तक 300 लाख मानव दिवस रोजगार देने का लक्ष्य पूरा कर लेता है, तो केंद्र सरकार के समक्ष और अधिक वृद्धि का मामला प्रस्तुत किया जा सकता है। पिछले वर्ष भी केंद्र सरकार द्वारा श्रम दिवसों की संख्या बढ़ाकर 350 लाख श्रम दिवस कर दी गई थी, हालांकि प्रारंभिक स्वीकृति 275 लाख श्रम दिवस की थी।

हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण विकास एवं पंचायत निदेशक राघव शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत उपलब्ध कराए जाने वाले कार्यदिवसों की संख्या पिछले वित्त वर्ष के 275 लाख से बढ़ाकर चालू वित्त वर्ष में 300 लाख कर दी गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराने का 20 प्रतिशत लक्ष्य पहले ही पूरा कर लिया है। यदि राज्य जनवरी 2025 तक 300 लाख कार्यदिवसों का लक्ष्य पूरा कर लेता है, तो राज्य में उपलब्ध कराए जाने वाले कार्यदिवसों की संख्या में और वृद्धि के लिए केंद्र सरकार के समक्ष मामला प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी केंद्र सरकार ने बाद में इसे बढ़ाकर 350 लाख कार्यदिवस कर दिया था, हालांकि प्रारंभिक स्वीकृति 275 लाख कार्यदिवसों की थी।

हाल ही में मौजूदा कांग्रेस सरकार ने राज्य में मनरेगा मजदूरी 240 रुपये प्रतिदिन से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन कर दी थी। केंद्र सरकार 235 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देती है, जबकि बाकी हिस्सा राज्य सरकार को देना होता है।

राघव शर्मा ने बताया कि जून से राज्य में मनरेगा मजदूरों को 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी देने के लिए संबंधित जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। मनरेगा के तहत 300 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने की योजना एक अप्रैल से लागू की जा रही है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से जून तक मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को बढ़ी हुई मजदूरी का बकाया जल्द ही दे दिया जाएगा।

मनरेगा योजना के तहत पंजीकृत ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को एक वर्ष में 120 दिन तक रोजगार मिल सकता है। यहां सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार हिमाचल को मनरेगा योजना के तहत सालाना 1200 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध कराती है, जबकि राज्य सरकार ने मनरेगा मजदूरों को केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली 236 रुपये की दैनिक मजदूरी के मुकाबले 64 रुपये अधिक भुगतान के लिए करीब 25 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है।

कोविड महामारी के दौरान हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को रोजगार और आय प्रदान करने के लिए मनरेगा राज्य सरकार के लिए बहुत काम आई। यह योजना हिमाचल के निचले इलाकों जैसे कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर जिलों में भी लोकप्रिय रही, जहां जमीन की जोत छोटी है और खेती बारिश पर निर्भर है।

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